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Monday, July 18, 2011

कहाँ हो तुम अब भोलेनाथ


आज सावन का पहला सोमवार है ! सभी पाठकों को श्रावण मास की हार्दिक शुभकामनायें !

कहाँ हो तुम अब भोलेनाथ !

असुरों ने धरती को है आक्रान्त किया ,

सीधे सादे जन मन को है त्रस्त किया ,

कहाँ छिपा कर रखा है डमरू अपना ,

कब आओगे तज कर सिंहासन अपना !

लगी है तुमसे सारी आस ,

कहाँ हो तुम अब भोले नाथ !

शशि शेखर को तुमने माथे पर धारा ,

पावन गंगा को निज केशों में धारा ,

सर्प विषैले हिय पर शोभा पाते हैं ,

भूत पिशाच चरण रज पाने आते हैं !

कहाँ है गण चर सारे आज !

कहाँ हो तुम अब भोले नाथ !

धरती पर आई कैसी विपदा भारी ,

दुष्टों की करनी से मानवता हारी ,

लेकर अपनी फ़ौज ज़रा नीचे आओ ,

खोलो तीजा नेत्र, खलों को धमकाओ !

उठाओ अपना भाला आज ,

कहाँ हो तुम अब भोलेनाथ !

धरती को असुरों से खाली करना है ,

भक्तों के दुःख औ पीड़ा को हरना है ,

ताण्डव अपना इस धरती पर कर जाओ ,

काम, क्रोध, मद, लोभ भस्म सब कर जाओ !

तुम्हारी यहाँ ज़रूरत आज ,

कहाँ हो तुम अब भोलेनाथ !

साधना वैद