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Thursday, July 17, 2014

प्रेमगीत



मेघों ने गुनगुना कर
हवा के लहराते आँचल पर
पानी की सियाही से
एक मधुर सा
प्रेमगीत लिख दिया है !
उत्फुल्ल धरा ने
उल्लसित हो
अपने रोम-रोम में इस
प्यार भरी इबारत को
आत्मसात कर लिया है !
बारिश के इस प्रेमगीत ने
आकुल धरा पर जैसे
जादू सा कर दिया है !
बूंदों के स्नेहिल स्पर्श की
प्यार भरी थपकी से 
उसका म्लान मुख
पल भर में ही
पुलकित हो उठा है !
नवोढ़ा अभिसारिका
की तरह वह
सोलह श्रृंगार कर
और चमचमाती
धानी चूनर ओढ़  
अपने प्रियतम की
प्रतीक्षा में
सजने संवरने लगी है !
इस प्रेम गीत की
मधुर लय पर
सारी सृष्टि ही जैसे
थिरकने लगी है !

साधना वैद