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Friday, March 18, 2016

हाँ ! वो सच्चे वीर थे




हाँ ! वो सच्चे वीर थे
भारत की पावन माटी के
वो रक्षक रणवीर थे !
सबल सशक्त शत्रु के आगे 
झुके नहीं नत मस्तक हो !
कमर तोड़ने को शत्रु की
लड़ते रहे समर्पित हो !
हँसते-हँसते झूल गये वो
फाँसी के फंदे को चूम !
थी उनमें कुछ बात अनोखी  
रहते थे मस्ती में झूम !
सीमित साधन और निर्धनता
कभी न आड़े आ पाई !
बड़े–बड़े उनके करतब से
दुश्मन पर भी बन आई !
जाने कितने फौत हो गये
जालियाँवाला बाग में
जाने कितने लटकाए पेड़ों पर
वन और बाग में !
भगत सिंह, सुख देव, राजगुरु
अशफाकुल्ला और आज़ाद
जान लुटा दी सबने अपनी
करने को भारत आज़ाद !
और न जाने कितने ही
दीवानों का लिखा है नाम
भारत माता की रक्षा में
हँस कर दे दी अपनी जान !
काश आज के भारत वासी
याद रखें उनका बलिदान
जात पात और ऊँच नीच को
भूल करें उनका सम्मान !
चलें दिखाए उनके पथ पर
करें देश पर वो अभिमान
अपने सत्कर्मों से रौशन
करें विश्व में अपना नाम !

साधना वैद