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Tuesday, September 17, 2019

मत करना आह्वान कृष्ण का


मत करना आह्वान कृष्ण का

जीवन संग्राम में
किसी भी महासमर के लिये
अब किसी भी कृष्ण का
आह्वान मत करना तुम सखी !
किसी भी कृष्ण की प्रतीक्षा
मत करना !
इस युग में उनका आना
अब संभव भी तो नहीं !
और उस युग में भी
विध्वंस, संहार और विनाश की
वीभत्स विभीषिका के अलावा
कौन सा कुछ विराट,
कौन सा कुछ दिव्य,
और कौन सा कुछ
गर्व करने योग्य
दे पाये थे वो ?
जीत कर भी तो
सर्वहारा ही रहे पांडव !
अपनी विजय का कौन सा
जश्न मना पाये थे वो ?
पांडवों जैसी विजय तो
अभीष्ट नहीं है न तुम्हारा !
इसीलिये किसी भी युग में
ऐसी विजय के लिये
तुम कृष्ण का आह्वान
मत करना सखी !
विध्वंस की ऐसी विनाश लीला
अब देख नहीं सकोगी तुम
और ना ही अब
हिमालय की गोद में
शरण लेने के लिये
तुममें शक्ति शेष बची है !

साधना वैद



12 comments :

  1. सटीक प्रश्न और उत्तम रचना

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    1. हार्दिक धन्यवाद अनीता जी ! आभार आपका !

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  2. कृष्ण मेरे अंदर हैं सखी,
    मेरी स्थिति की रास थामे,
    हिमालय ने मुझे रास्ता दिया है,
    तुम अपनी सखी को जानती हो न,
    हारेगी नहीं,
    थकेंगी नहीं,
    रुकेगी नहीं ...
    आगाज़ करो सखी

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    1. अपनी सखी की यही जिजीविषा मुझे उल्लसित करती है, प्रेरित भी करती है और अचंभित भी करती है ! नमन इस एकात्मता को, आस्था को और इस समर्पण को !

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  3. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल गुरुवार (19-09-2019) को      "दूषित हुआ समीर"   (चर्चा अंक- 3463)     पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    --
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार शास्त्री जी ! सादर वन्दे !

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  4. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज बुधवार 18 सितंबर 2019 को साझा की गई है......... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार यशोदा जी ! सप्रेम वन्दे सखी!

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  5. सुप्रभात
    भावपूर्ण सृजन |

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी ! सादर साभार !

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  6. बेहतरीन सामयिक प्रस्तुति नमन

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    1. हार्दिक धन्यवाद ऋतू जी ! आभार आपका !

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