Followers

Tuesday, September 24, 2019

अनसुने गीत



तुम सुनो ना सुनो
सुबह की प्रभाती
दिन का ऊर्जा गान
साँझ का सांध्य गीत
रात्रि की लोरी
हमें तो रोज़ ही गाना है
यह स्वर साधना हमारी
दिनचर्या का
अनिवार्य अंग है !
हम नित्य इन सुरों को
साधते हैं और तुम
नित्य अनसुना कर देते हो
या इन्हें सुन कर भी
इनका कोई असर नहीं लेते !
नित्य गीत गाना
हमारी आदत है और
नित्य इन्हें अनसुना कर देना
तुम्हारी फितरत है !
तुम्हीं कहो ग़लत कौन है
तुम या हम ?
कि हमारे इतने मीठे
इतने सुरीले
इतने मधुर गीत
यूँ ही अनसुने
हवाओं में बिखर कर
व्यर्थ हो जाते हैं और
कितने ही कातर प्राण
स्पंदित होने से
वंचित रह जाते हैं?


साधना वैद


22 comments :

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (25-09-2019) को    "होगा दूर कलंक"  (चर्चा अंक- 3469)     पर भी होगी। --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
     --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  

    ReplyDelete
    Replies
    1. आपका ह्रदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार शास्त्री जी ! सादर वन्दे !

      Delete
  2. व्वाहहहह..
    बेहतरीन..
    सादर...

    ReplyDelete
    Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद दिग्विजय जी ! आभार आपका !

      Delete
  3. बेहद सुंदर रचना आदरणीया दी

    ReplyDelete
    Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद अभिलाषा जी ! आभार आपका !

      Delete
  4. बहुत सुन्दर सृजन आदरणीया दी ।

    ReplyDelete
    Replies
    1. ह्रदय से धन्यवाद आपका मीना जी ! आभार आपका !

      Delete
  5. बेहतरीन सृजन आदरणीया
    सादर

    ReplyDelete
    Replies
    1. आपका बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार अनीता जी ! अभिनन्दन !

      Delete
  6. Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद जी ! आभार आपका !

      Delete
  7. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना हमारे सोमवारीय विशेषांक
    ३० सितंबर २०१९ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

    ReplyDelete
    Replies
    1. आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार श्वेता जी! सप्रेम वन्दे !

      Delete
  8. खूबसूरत अंदाज़
    लाजवाब रचना।
    पधारें शून्य पार 

    ReplyDelete
    Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद रोहितास जी ! आभार आपका !

      Delete
  9. वाह !बेहतरीन सृजन दी जी

    ReplyDelete
    Replies
    1. आपका हृदय बहुत बहुत आभार अनीता जी ! दिल से शुक्रिया !

      Delete
  10. बेहतरीन सृजन ,सादर नमस्कार

    ReplyDelete
    Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद कामिनी जी ! आभार आपका !

      Delete
  11. बेहतरीन रचना।

    ReplyDelete
    Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद सुजाता जी ! आभार आपका !

      Delete