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Sunday, July 4, 2010

छोटी सी आशा

मुट्ठी भर आसमान
टुकड़ा भर धूप
दामन भर खुशियाँ
दर्पण भर रूप
इतना ही बस मैंने तुमसे माँगा है !

नींद भर सपने
कंठ भर गीत
बूँद भर सावन
नयन भर प्रीत
इससे ज्यादह कब कुछ मैंने माँगा है !

आँचल भर आँसू
ह्रदय भर पीर
शब्द भर कविता
पर्वत भर धीर
यह भी तो मैंने ही तुमसे माँगा है

यह भी क्या तुम
मुझे नहीं दे पाओगे ?
छोटी सी आशा भी
ना सह पाओगे ?
तुम कैसे 'भगवान'
मुझे शक होता है
जागे सबके भाग
मेरा क्यों सोता है !

साधना वैद