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Thursday, July 8, 2010

दिल दरिया

लम्हा-लम्हा ज़िंदगी,
तिनका-तिनका नशेमन,
कतरा-कतरा हर खुशी,
रेशा-रेशा पैरहन !

जो कुछ है बस
ये ही मेरी पूँजी है,
दो सुर की सरगम से
दुनिया गूँजी है !

यह मेरे सारे
जीवन की बाज़ी है,
इस दौलत पर
दिल भी मेरा राजी है !

अगर तुम्हारे मन को
कुछ भी भाता है,
मुझे किफायत से भी
रहना आता है !

नहीं हटूँगी पीछे
आज कसम ले लो,
चाहो तो इसमें से
आधा तुम ले लो !

साधना वैद