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Sunday, September 19, 2010

* परिणति *

भावों की भेल,
आँखों का खेल,
शब्दों का मेल,
प्यार की निशानी है !

होंठों पे गीत,
नैनों में मीत,
पाती में प्रीत,
जोश में जवानी है !

आँचल की छाँव,
सपनों का गाँव,
कविता की नाव,
प्यार की रवानी है !

उल्फत का मोल,
लोगों के बोल,
तल्खी का घोल,
रीत ये पुरानी है !

सूली पर प्यार,
रिश्तों की मार,
अपनों से हार,
दुःख भरी कहानी है !

साधना वैद