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Wednesday, November 23, 2011

कुछ कह न पायेंगे



किस्सा कहा जो दर्द का वो सह न पायेंगे ,
हर इक बयाँ पे रोये बिना रह न पायेंगे !
हर रंग है जफा का मेरी दास्ताँ में दोस्त ,
इलज़ाम खुद पे एक भी वो सह न पायेंगे !
सदियों से जिन किलों में मेरी रूह कैद है ,
छोटे से एक छेद से वो ढह न पायेंगे !
फौलाद में तब्दील जिन्हें वक्त कर चुका ,
आँसू हमारी आँख से वो बह न पायेंगे !
बर्दाश्त हैं ज़ुल्म-ओ-सितम दुनिया के सब हमें ,
इक अश्क उनकी आँख में हम सह न पायेंगे !
हर लफ्ज़ है रूदाद मेरे दर्द की ए दोस्त ,
ना पूछिये कुछ और हम कुछ कह न पायेंगे !


साधना वैद