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Tuesday, January 14, 2014

सुहानी भोर




मकर संक्रांति एवँ उत्तरायण की हार्दिक शुभकामनायें 


चाँदनी के शुभ्र 
श्वेत पुष्पों से सजी  
कोहरे की सुरमई चादर ओढ़
कोई नवोढ़ा आज मेरे घर के
बगीचे में आई है ,
सुदूर प्राची के क्षितिज से
सहमती, सकुचाती,
ठिठकती, झिझकती,
धीमे-धीमे दबे पाँव चलती
सुहानी भोर आज मेरे घर के
द्वार पर आई है !
ओस के नूपुरों की
रुनझुन पाजेब पहन 
उषा सुन्दरी ने
बड़े सवेरे घर के प्रवेश द्वार पर
धीरे से दस्तक दी है ,
उसके उनींदे कमल नयनों ने
जैसे सुबह के सूर्य की
मुलायम ऊष्मा से कुसुमित
सारे सुरभित सुमनों की
मादक मदिरा पी ली है !
बालारुण के कोमल उज्ज्वल
सुनहरे तारों ने 
उसकी सुरमई चादर में 
ज़रदोज़ी के खूबसूरत 
बेलबूटे काढ़ दिये हैं,
और भुवन भास्कर के रथ को
द्रुत गति से गगनारूढ़ होते देख
अमा निशा ने आनन फानन में
अपने सारे चिन्ह समेट
बालारुण की शुभाशंसा में  
नूतन ध्वज गाढ़ दिये हैं !
घरों में पूजा अर्चना ,
मंदिरों में आरती की घंटियाँ,
विद्यालयों में सुबह की प्रार्थना
और मस्जिदों में अज़ान के स्वर
मुखरित होने को हैं ,
सजग हो जाओ नगरवासियों
दिवाकर की प्रखर रश्मियों के
तेजोमय ताप में अब 
संसार भर का सारा कलुष
और सारे दुष्कृत्य
जल कर भस्म होने को हैं !
आओ नत मस्तक हो
इस सुहानी भोर में
नवोदित ज्योतिरादित्य से
निश्च्छल और निष्पाप
निर्मल और निष्कलंक
जीवन जीने के लिये
सच्चे मन से प्रार्थना करें, 
उत्तरायण होते सूर्य नारायण से
समस्त विश्व के कल्याण के लिये
पावन हृदय से 
मंगल कामना करें ! 


साधना वैद !


चित्र - गूगल से साभार !