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Wednesday, October 2, 2019

ताशकंद यात्रा



पहला दिन – २४ अगस्त, २०१९
एक छोटी सी लेकिन बड़ी सुखद, ऊर्जावान, और ताज़गी भरी उज्बेकिस्तान की यात्रा से लौटी हूँ ! कितने अर्थों में यह यात्रा मुझे समृद्ध कर गयी एकदम से बता पाना मुश्किल है लेकिन इतना बता सकती हूँ कि इस यात्रा का हर पल हर लम्हा मैंने शिद्दत से जिया है, और हर पल नए अनुभव, नये एह्सास और नई दृष्टि से खुद को निखारा है ! हर दिन स्वयं को अपने ज्ञान और अनुभव के छोटे से दायरे से बाहर निकाल दुनिया के वृहद्, व्यापक, और विशाल स्वरुप को निहार उसे सराहने का सलीका सिखाया है और नए देश, नए स्थान, नयी संस्कृति, नए लोग, नयी भाषा, नए परिवेश में स्वयं को तदाकार कर उनके साथ हर पल को भरपूर जी लेने के आनंद को जीना सिखाया है !
अवसर था विश्व मैत्री मंच के अंतर्राष्ट्रीय साहित्यिक सम्मलेन का और मेरा सौभाग्य था कि मुझे इस सम्मलेन में भाग लेने का मौक़ा मिला ! मेरे सद्य प्रकाशित कहानी संग्रह ‘तीन अध्याय’ का विमोचन भी इसी कार्यक्रम के तहत ताशकंद में होना निश्चित हुआ ! मेरे लिये उल्लसित होने का एक कारण यह भी था ! २९ साहित्यकारों का ग्रुप इस सम्मलेन में भाग लेने के लिये जा रहा था ! ताशकंद जाने की तारीख २४ अगस्त तय हुई और ग्रुप के सभी सम्मानित सदस्यों से मेरी पहली मुलाक़ात दिल्ली के इंदिरा गाँधी अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर ही हुई ! उजबेक एयरलाइंस से हमारी फ्लाईट बुक थी ! २४ तारीख की शाम पाँच बज कर २० मिनिट पर हवाई जहाज ने ताशकंद के लिये उड़ान भरी ! यात्रा बहुत लंबी और थकान भरी नहीं थी ! मन में उत्साह भरा था और एक नया देश नया शहर देखने की उत्सुकता थी ! हमारी मंज़िल पास आती जा रही थी ! रोशनी में नहाये ताशकंद की बेमिसाल संरचना और खूबसूरती जहाज की खिड़की से ही मन को लुभा रही थी ! रात के ठीक आठ बजे हमारा जहाज ताशकंद एयरपोर्ट पर उतरा और ताशकंद की भूमि पर हमने अपना पहला कदम रखा ! कन्वेयर बेल्ट से अपना सामान एकत्रित करते और कस्टम्स इत्यादि की सारी औपचारिकताएं पूरी करते लगभग नौ बज चुके थे ! उसके बाद ही हम बाहर निकल सके !
एयरपोर्ट के बाहर एक बेहद खूबसूरत नौजवान हमारी ग्रुप लीडर, विश्व मैत्री मंच की अध्यक्षा, श्रीमती संतोष श्रीवास्तव जी के नाम का प्लेकार्ड लिये खड़ा हुआ था ! यह हमारा टूर गाइड था मोहोम्मद ज़ियाद ! हिन्दी बोलने में माहिर, बेहद विनम्र, बेहद खुश मिजाज़ और हँसमुख ! एक खूबसूरत बस में बैठ कर हम अपने होटल ग्रांड प्लाजा के लिये चल पड़े ! रात्रि भोजन का समय हो गया था तो यह सुनिश्चित किया गया कि भोजन करने के बाद ही होटल जायेंगे ताकि सब समय से विश्राम कर सकें और सुबह के सम्मलेन के लिये बिल्कुल तारो ताज़ा उठ सकें ! हवाई यात्रा आरामदेह थी और ताशकंद की रौनक मन को लुभा रही थी तो सभीने इस प्रस्ताव का स्वागत किया और रास्ते में होने वाली तरह तरह की गतिविधियों का आनंद उठाते हुए हम लोग होटल आगत की ओर पैदल बढ़ चले जहाँ हमारे रात्रि भोज की व्यवस्था थी !
ताशकंद के रंगारंग जीवन को देखने का पहला अवसर था ! सड़कें बड़ी ही खूबसूरती से सजी हुई थीं ! ऐसा लग रहा था जैसे कोई उत्सव मनाया जा रहा हो ! सड़कों पर कई जगह परफॉर्मिंग आर्टिस्ट्स अपना हुनर दिखाने में मशगूल थे ! कहीं कोई संगीतकार बड़ी तल्लीनता से कोई वाद्य बजा रहा था तो कहीं कोई चित्रकार फरमाइश पर लोगों के पोर्ट्रेट बना रहा था ! खूबसूरत रंग बिरंगे गुब्बारों की छटा बिखेरते गुब्बारे वाले बच्चों को लुभा रहे थे तो कहीं तरह तरह की राइड्स का मज़ा लेते हुए बच्चे अपने अपने वाहनों को सड़क पर सरपट दौड़ा रहे थे !
सबसे अधिक जिस बात ने प्रभावित किया वह था ताशकंद के लोगों का हमारे ग्रुप के लोगों के साथ दोस्ताना व्यवहार ! हम भारत से आये हैं इसका अनुमान उन्हें हम लोगों की वेशभूषा से लग चुका था ! सब देखते ही मुस्कुरा कर हमसे ‘नमस्ते’ बोल कर अभिवादन करते थे ! हम लोगों के साथ फोटो खिंचवाना चाहते थे और राज कपूर, शाहरुख खान, आमिर खान और अमिताभ बच्चन के नाम बोल कर हिंदुस्तानियों के प्रति अपने लगाव और आत्मीयता का प्रदर्शन कर रहे थे ! उनके इस व्यवहार से सच में मैं अभिभूत थी !
ताशकंद की रौनक का मज़ा लेते हुए हम आगत फैमिली रेस्टोरेंट पहुँच गए थे ! यहीं पर हम लोगों के लिये डिनर का प्रबंध था ! तरह तरह के स्वादिष्ट पेय और व्यंजन भोजन में शामिल थे ! उज्बेकिस्तान की खूबसूरत नर्तकियाँ अपनी परियों सी खूबसूरत पोशाकों में फ्लोर पर डांस कर रही थीं ! ग्रुप की कुछ नौजवान उत्साही सदस्याओं ने भी फ्लोर पर कुछ देर उनका साथ दिया ! भारतीय मेहमानों को देख कर हिन्दी फिल्मों के लोकप्रिय गीतों पर उन नर्तकियों ने खूब जम कर नृत्य किया ! सबका खूब मनोरंजन हुआ !
भोजन के बाद हम लोग रात को लगभग ११ बजे अपने होटल ग्रांड प्लाजा पहुँचे ! सबको कमरे अलॉट होने में और अपने अपने मोबाइल को होटल के वाई फाई से कनेक्ट करने में कुछ समय लगा ! एक मज़ेदार बात जो वहाँ नोटिस की वह यह थी कि ग्राउण्ड फ्लोर को वहाँ फर्स्ट फ्लोर कहते हैं ! हमारे यहाँ पहली मंजिल को फर्स्ट फ्लोर कहते हैं लेकिन ताशकंद में उसे सेकण्ड फ्लोर कहा जाता है ! हमारा कमरा तीसरी मंज़िल पर था ! बहुत आरामदेह और खूबसूरत सज्जा थी कमरे की ! सारी सुविधाएँ थीं बस कमरे में सीलिंग फैन्स नहीं थे ! अगली सुबह की प्रतीक्षा में जल्दी ही हम नींद के आगोश में चले गए !
तो यह था पहले दिन का वृत्तांत ! आपको तो अभी ताशकंद के बहुत से दर्शनीय स्थल दिखाना बाकी हैं ! दूसरे दिन का वृत्तांत अगली किश्त में ! तब तक के लिये आज्ञा दें !
साधना वैद





10 comments :

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में " गुरुवार 3 अक्टूबर 2019 को साझा की गई है......... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवम आभार मीना जी ! सप्रेम वंदे !

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (04-10-2019) को   "नन्हा-सा पौधा तुलसी का"    (चर्चा अंक- 3478)     पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।  
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ 
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवम आभार शास्त्री जी ! सादर वंदे !

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  3. सजीव और रोचक यात्रा-वृतांत साधना जी.

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    1. हार्दिक धन्यवाद गोपेश जी । आभार आपका

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  4. बहुत रोचक विवरण |बेसब्री से दूसरी किश्त का इन्तजार है |

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    1. दिल से धन्यवाद जी ! जल्दी ही आयेगी दूसरी किश्त भी ! थोडा मज़ा इंतज़ार का भी लीजिये !

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  5. दूसरा भाग भी पढ़ लिया दी। अब तीसरे का इंतजार। जल्दी लिखिएगा। नए कहानी संग्रह के प्रकाशन पर बधाई एवं शुभकामनाएँ। सादर।

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    1. हार्दिक धन्यवाद मीना जी ! मेरा यात्रा संस्मरण आपको अच्छा लग रहा है जान कर हार्दिक प्रसन्नता हुई ! अगली कड़ी जल्दी ही प्रेषित करूँगी ! आभार आपका !

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