Followers

Sunday, May 31, 2026

 



प्यारी बिटिया 

कितनी मोहक 

कितनी आकर्षक है 

तुम्हारे अधरों पर 

ठिठकी यह मुस्कान !

कितना लुभा रहे हैं  

तुम्हारे खुले बिखरे ये बाल !

लगता है दो तीन दिन से 

कंघी ने स्पर्श नहीं किया है इन्हें, 

लेकिन फिर भी कितना 

खिल रहा है तुम्हारा चेहरा 

इस बिखरी केशराशि से घिरा !

आँखों में कितना निश्छल सा आग्रह है 

कितना निष्पाप सा आमंत्रण है 

अपना अधखाया हुआ 

जूठा सैंडविच साझा करने का !

कैसे न बलिहारी जाऊँ 

तुम्हारी मासूमियत पर 

मेरी प्यारी सी गुड़िया रानी ! 

माँ हूँ न तुम्हारी ! 

सौ सौ जान कुर्बान जाती हूँ  

तुम्हारी इस दरियादिली पर 

तुम्हारी लाड़ भरी मनुहार पर !

किसीकी नज़र ना लगे 

मेरी राजकुमारी को 

बस यही दुआ है 

नसीबों वाली इस माँ की ! 


साधना वैद 





No comments :

Post a Comment