फूलों की चाह है तो काँटों को चुनना होगा
उड़ने की चाह है तो पंखों को खुलना होगा
ऐसे ही नहीं होती हर चाहत किसी की पूरी
कुछ बनने की चाह है तो सपनों को बुनना होगा !
साधना वैद
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