भारत भूमि के विशाल समर क्षेत्र में
छिड़ गया है महासंग्राम
आमने सामने हैं दोनों सेनाएं
एक तरफ हैं सर्वशक्तिमान प्रभु
अपने सारे दिव्यास्त्र और ब्रह्मास्त्रों के
साथ
कहीं कोरोना वायरस से तबाही मचाते
तो कहीं हाहाकारी अम्फान में सबको डुबाते
कभी टिड्डी दलों के माध्यम से
सारी
फसलों का सर्वनाश करते
तो कभी निसर्ग तूफ़ान के सहारे
समस्त निरीह प्राणियों के जीवन में
विप्लवकारी उथल पुथल मचाते !
ऐसा लगता है संहारकर्ता शिवजी ने
अपना तीसरा नेत्र खोल लिया है !
समर भूमि में ईश्वर की इस परम प्रबल
चतुरंगिनी सेना के सामने है
अत्यंत दीन हीन इंसानों की निहत्थी सेना
अत्यंत आतंकित और भयभीत
जिनके पास अस्त्र शस्त्र के नाम पर हैं
चंद मास्क, कुछ सेनीटाइज़र्स,
कुछ साबुन की बट्टियाँ,
कुछ खाँसी ज़ुकाम की गोलियाँ
और कूटनीतिक रणनीति के तहत
ढेर सारी नसीहतें, पाबंदियाँ और सख्तियाँ
इस महासमर में प्रभु की इतनी
प्रबल और शक्तिशाली सेना के सामने
आम इंसान की यह निर्बल असहाय सेना
कहीं नहीं ठहर सकती लेकिन इस
आम इंसान में हिम्मत और हौसला बहुत है,
इसकी जिजीविषा ज़बरदस्त है !
जो ये एक बार ठान ले तो
हर आपदा को परे ढकेल
माउंट एवरेस्ट तक को लाँघ जाने की और
अतल अथाह सागरों को पार कर लेने की
अद्भुत क्षमता है इस आम इंसान में !
तभी ना भारत की सारी सड़कों पर
हर विपदा को चुनौती देने के लिए
यह सर्व साधारण सेनानी सीना ताने
चला जा रहा है अपने गंतव्य की ओर !
देखना है महासंग्राम के अंत में
इस समरभूमि में विजय पताका
किसकी लहरायेगी
सर्वशक्तिमान प्रभु की या
सर्वहारा इस आम इंसान की !
साधना वैद