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Wednesday, February 13, 2013

अभी तक याद हैं













वो नादान निगाहों की
बेचैन चहलकदमियाँ ,
वो हिलते होंठों की ढेर सारी
अनकही अनसुनी बतकहियाँ ,
वो क्लास में गुपचुप
फुसफुसाती खामोश चुहलबाजियाँ ,
वो कॉपी फाड़ छोटी छोटी गोलियाँ बना
दोस्तों पर फेंकने की शरारत भरी गुस्ताखियाँ
अभी तक याद हैं !

वो ना मिलने पर सुनाई जाने वाली
झूठी सच्ची कहानियाँ ,
वो काग़ज़ के पुर्जों पर लिखी
आधी अधूरी टूटी फूटी तुकबन्दियाँ ,
वो किताब के पन्नों में दबी मिली
मोगरे गुलाब की सूखी पाँखुरियाँ ,
वो लकड़ी की संदूकची में बंद
दोस्तों की दी हुई छोटी-छोटी निशानियाँ
अभी तक याद हैं !

वो फूलों भरी डालियों सी लचकती महकती
आसमान तक गूँजती मदमाती किलकारियाँ ,
वो नन्हे-नन्हे परिंदों को पलक झपकते
तारों के संग बतियाते देखने की हैरानियाँ ,
वो तूफानी रफ़्तार से सरपट दौड़तीं
ख़्वाबों ख्यालों की बेलगाम रवानियाँ ,
वो छोटी-छोटी बातों पर रूठी सहेलियों को
मनाने की कवायद में दिन भर की गलबहियाँ
अभी तक याद हैं ! 
 
वो चाँद सूरज सितारों से हर वक्त
होड़ करने को तैयार अल्हड़ अलमस्त जवानियाँ ,
वो हवाओं को आँचल में बाँधने की जिद में
ऊँचे दरख्तों की नाज़ुक शाखों के साथ अठखेलियाँ ,
वो दुनिया जहान को अपनी मुट्ठी में
बंद कर लेने की जोश भरी खुशगुमानियाँ ,
वो नदी के किनारे घण्टों हलके-हलके पत्थरों को
लहरों पर तैराने की जिद भरी नादानियाँ
अभी तक याद हैं !

वो मन की व्यथा कथा की अनुत्तरित चिट्ठियों पर
मान भरे क्षुब्ध मन की पीर भरी सिसकियाँ ,
वो रेशमी रूमाल में बँधे जान से भी प्यारे चंद खतों की 
अपने ही हाथों जलाई होली से उठती चिनगारियाँ ,
वो आहत हृदय के अंतस्तल से फूटतीं   
कभी ना थमने वाली हाहाकार भरी हिचकियाँ ,
और वो फिर उसके बाद जीवन में पसरे दग्ध तपते
मरुथल की अनंत असीम कैक्टसी वीरानियाँ
अभी तक याद हैं !

साधना वैद !