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Thursday, August 6, 2020

सुधियों का क्या ... !



सुधियों का क्या ये तो यूँ ही घिर आती हैं 
पर तुमने तो एक बार पलट कर ना देखा ।

जब चंदा ने तारों ने मेरी कथा सुनी 
जब उपवन की कलियों ने मेरी व्यथा सुनी 
जब संध्या के आँचल ने मुझको सहलाया 
जब बारिश की बूँदों ने मुझको दुलराया ।
भावों का क्या ये तो यूँ ही बह आते हैं 
पर तुमने तो एक बार पलट कर ना देखा ।

जब अंतर्मन में मची हुई थी इक हलचल 
जब बाह्य जगत में भी होती थी उथल-पुथल 
जब सम्बल के हित मैंने तुम्हें पुकारा था 
जब मिथ्या निकला हर इक शब्द तुम्हारा था ।
नयनों का क्या ये तो बरबस भर आते हैं
पर तुमने तो एक बार पलट कर ना देखा ।

जब मन पर अनबुझ संतापों का फेरा था 
जब जग की छलनाओं ने मुझको घेरा था 
जब गिन गिन तारे मैंने काटी थीं रातें 
जब दीवारों से होती थीं मेरी बातें । 
छालों का क्या ये तो यूँ ही छिल जाते हैं 
पर तुमने तो एक बार पलट कर ना देखा । 

जब मन में धधका था इक भीषण दावानल 
जब आँखों से बहता था इक सागर अविरल 
जब दंशों ने था दग्ध किया मेरे दिल को 
जब हटा न पाई मन पर पड़ी हुई सिल को ।
ज़ख्मों का क्या ये तो यूँ ही रिस जाते हैं 
पर तुमने तो एक बार पलट कर ना देखा ।


चित्र - गूगल से साभार 


साधना वैद 

22 comments :

  1. बहुत सुंदर

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    1. हार्दिक धन्यवाद केडिया जी ! आभार आपका !

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  2. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार(07-08-2020) को "राम देखै है ,राम न्याय करेगा" (चर्चा अंक-3786) पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है.

    "मीना भारद्वाज"

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    1. आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार मीना जी ! सप्रेम वन्दे !

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  3. सुन्दर रचना

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    1. हार्दिक धन्यवाद महोदय ! बहुत बहुत आभार आपका !

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  4. उत्तम भाव ।
    सादर ।

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    1. हार्दिक धन्यवाद हर्ष जी ! बहुत बहुत आभार आपका !

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  5. बहुत सुन्दर और भावप्रवण रचना।

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    1. हार्दिक धन्यवाद शास्त्री जी ! आपकी सराहना मिल गयी मेरा श्रम सार्थक हुआ ! आभार आपका !

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  6. भाव-विभोर करती रचना ! पर ''वैसे'' से कोई आशा भी क्यूँ रखना

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  7. हार्दिक धन्यवाद गगन शर्मा जी ! आप ठीक कहते हैं ! लेकिन जब भ्रमों का मोहजाल टूटता है तब अंतर का धधकना स्वाभाविक है ! आभार आपका !

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  8. हृदयस्पर्शी रचना

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    1. हार्दिक धन्यवाद अनुराधा जी ! हृदय से आभार आपका !

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  9. बहुत ही सुंदर हृदयस्पर्शी रचना दी ,सादर नमन आपको







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    1. हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार कामिनी जी ! रचना पाठकों के मन को छू जाए तो लेखन सफल हो जाता है !

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  10. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" सोमवार 10 अगस्त 2020 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार यशोदा जी ! सप्रेम वन्दे !

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    1. हार्दिक धन्यवाद गगन जी ! आभार आपका !

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  12. Replies
    1. हृदय से धन्यवाद एवं आभार आपका !

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