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Saturday, May 16, 2020

कोमल किसलय




देख रहे हो मुझे ?
कितना सुन्दर है मेरा रूप
कितना खुशनुमां है मेरा रंग
कितना कोमल है मेरा बदन
और कितनी मादक है मेरी खुशबू !
नन्हा सा अवश्य हूँ लेकिन
हौसला बहुत है मुझमें
इतने बड़े वृक्ष के इतने सारे
इतने पुराने फल फूल पत्ते
मेरा मुकाबला नहीं कर सकते !
हवा के एक हल्के से झोंके से
असंख्य पत्ते धराशायी हो जाते हैं
लेकिन मैं नन्हा सा कोमल किसलय
अपनी डाल पर मजबूती से टिका रहता हूँ
बड़ी से बड़ी आँधी भी मुझे
न डरा पाती है, न झुका पाती है,
न ही धरा पर गिरा पाती है !
मुझमें अपार संभावनाएं हैं
बढ़ने की, विकसित होने की
संसार को कुछ देने की !
कोमल हूँ पर कमज़ोर नहीं
नन्हा हूँ पर नगण्य नहीं
वृक्ष का अस्तित्व मुझसे है
वृक्ष का सौन्दर्य मुझसे है
वृक्ष की जान मुझमें है !
मैं जीवन का प्रतीक हूँ !
मैं नन्हा कोमल किसलय हूँ !
जिस भी किसी दिन वृक्ष में
अंकुर फूटना रुक जाएगा
नव पल्लवों का उगना बंद हो जायेगा
वह धीरे-धीरे सूखने लगेगा,
वह बीमार हो जाएगा
और एक दिन वह मर जाएगा !

साधना वैद







12 comments :

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शनिवार 16 मई 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. आपका बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार दिग्विजय जी ! सादर वन्दे !

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  2. Replies
    1. हृदय से धन्यवाद शास्त्री जी ! आभार आपका !

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  3. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा रविवार(१७-०५-२०२०) को शब्द-सृजन- २१ 'किसलय' (चर्चा अंक-३७०४) पर भी होगी।

    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    ….
    अनीता सैनी

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    1. आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार अनीता जी ! सप्रेम वन्दे !

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  4. Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद सुनीता जी ! स्वागत है आपका !

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  5. बहुत सुंदर प्रस्तुति

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    1. हार्दिक धन्यवाद अनुराधा जी ! आभार आपका !

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  6. बहुत बढ़िया

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    1. हार्दिक धन्यवाद केडिया जी ! बहुत बहुत आभार आपका !

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